भारत की अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता: 2024 ISSAR और भविष्य की योजनाएँ

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22 अप्रैल 2025 को, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने भारतीय अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता रिपोर्ट (ISSAR) 2024 जारी की, जो भारत की अंतरिक्ष संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। ISRO सिस्टम फॉर सेफ एंड सस्टेनेबल ऑपरेशन्स मैनेजमेंट (IS4OM) के तहत, यह रिपोर्ट अंतरिक्ष मलबे और अन्य खतरों से निपटने की भारत की रणनीति को रेखांकित करती है। यह वार्षिक दस्तावेज अंतरिक्ष पर्यावरण की स्थिति को समझने और सतत संचालन सुनिश्चित करने में हितधारकों का मार्गदर्शन करता है।

  • रिपोर्ट का उद्देश्य: राष्ट्रीय अंतरिक्ष संपत्तियों को मलबे और प्राकृतिक खतरों से बचाने के लिए जागरूकता।
  • IS4OM की भूमिका: सुरक्षित और सतत अंतरिक्ष संचालन के लिए ISRO की प्रणाली।
  • वार्षिक समीक्षा: हितधारकों को अंतरिक्ष पर्यावरण की वर्तमान स्थिति से अवगत कराना।

अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता: भारत की रणनीति

  • निगरानी और जोखिम प्रबंधन: निकट दृष्टिकोण जोखिमों का आकलन और अनियंत्रित वायुमंडलीय पुनः प्रवेश की भविष्यवाणी।
  • NETRA प्रोजेक्ट: रडार और ऑप्टिकल टेलीस्कोप के साथ अंतरिक्ष वस्तुओं की ट्रैकिंग।
  • सतत संचालन: अंतरिक्ष संपत्तियों को टकराव से बचाने के लिए सक्रिय उपाय।

ISRO की अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता (SSA) गतिविधियाँ भारत की अंतरिक्ष संपत्तियों को सुरक्षित रखने का आधार हैं। NETRA (नेटवर्क फॉर स्पेस ऑब्जेक्ट्स ट्रैकिंग एंड एनालिसिस) प्रोजेक्ट के तहत, ISRO रडार और ऑप्टिकल टेलीस्कोप का उपयोग करके अंतरिक्ष वस्तुओं को ट्रैक करता है। यह प्रणाली निकट दृष्टिकोण जोखिमों का आकलन करती है और अनियंत्रित वायुमंडलीय पुनः प्रवेश की भविष्यवाणी करती है, जिससे भारत के उपग्रह सुरक्षित रहते हैं।


वैश्विक प्रक्षेपण आँकड़े: 2024 का परिदृश्य

  • प्रक्षेपण गतिविधियाँ: 2024 में 261 प्रक्षेपण प्रयास, 254 सफल मिशन, 2578 कार्यशील उपग्रह जोड़े गए।
  • कम प्रक्षेपण: 2023 की तुलना में ऑर्बिट में रखी गई वस्तुओं की संख्या में कमी।
  • वृद्धि का शिखर: अंतरिक्ष गतिविधियों में अभूतपूर्व वृद्धि।

2024 वैश्विक अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए एक महत्वपूर्ण वर्ष रहा, जिसमें 261 प्रक्षेपण प्रयासों के साथ 2578 कार्यशील उपग्रह अंतरिक्ष में स्थापित किए गए। हालांकि, कम प्रक्षेपणों के कारण ऑर्बिट में रखी गई कुल वस्तुओं की संख्या 2023 से कम रही। यह वृद्धि अंतरिक्ष में बढ़ती भीड़ और मलबा प्रबंधन की आवश्यकता को दर्शाती है।


अंतरिक्ष मलबा: एक बढ़ती चुनौती

  • ऑर्बिट ब्रेक-अप: 2024 में लॉन्ग मार्च रॉकेट स्टेज सहित तीन ऑर्बिट ब्रेक-अप घटनाएँ।
  • मलबा वृद्धि: वर्ष के अंत तक अंतरिक्ष मलबा वस्तुओं की संख्या 3665 तक पहुँची।
  • प्रबंधन की जरूरत: मलबा वृद्धि से अंतरिक्ष संपत्तियों को खतरा।

अंतरिक्ष मलबा एक वैश्विक चिंता का विषय है, और 2024 में तीन ऑर्बिट ब्रेक-अप घटनाओं ने इस समस्या को और बढ़ाया। लॉन्ग मार्च रॉकेट स्टेज की विफलता ने मलबा वृद्धि में योगदान दिया, जिसके परिणामस्वरूप कुल 3665 मलबा वस्तुएँ दर्ज की गईं। ISRO इस चुनौती से निपटने के लिए सक्रिय कदम उठा रहा है।


भारत की अंतरिक्ष संपत्तियाँ: गर्व का क्षण

  • उपग्रहों की संख्या: 136 अंतरिक्ष यान, जिसमें 22 LEO और 31 GEO में कार्यशील।
  • उल्लेखनीय मिशन: चंद्रयान-2 ऑर्बिटर और आदित्य-L1 सफलतापूर्वक संचालित।
  • वृद्धि का प्रतीक: भारत की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमता।

दिसंबर 2024 तक, भारत ने 136 अंतरिक्ष यान लॉन्च किए, जिनमें 22 निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) और 31 भू-समकालिक कक्षा (GEO) में कार्यशील उपग्रह शामिल हैं। चंद्रयान-2 ऑर्बिटर और आदित्य-L1 जैसे मिशन भारत की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में उन्नति का प्रतीक हैं, जो वैश्विक मंच पर देश की ताकत को प्रदर्शित करते हैं।


टकराव से बचाव: ISRO की सतर्कता

  • टकराव से बचाव युद्धाभ्यास (CAM): 2024 में 53,000 से अधिक टकराव चेतावनियाँ जारी।
  • कुशल रणनीति: 10 CAM निष्पादित, बेहतर तकनीकों के साथ कम युद्धाभ्यास।
  • सुरक्षा प्राथमिकता: उपग्रहों को जोखिमों से बचाना।

ISRO ने टकराव से बचाव युद्धाभ्यास (CAM) के माध्यम से अपने उपग्रहों को सुरक्षित रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए। 2024 में, 53,000 से अधिक चेतावनियाँ जारी की गईं, और 10 CAM निष्पादित किए गए। बेहतर तकनीकों ने अनावश्यक युद्धाभ्यास को कम किया, जिससे अंतरिक्ष संपत्ति सुरक्षा में दक्षता बढ़ी।


अंतरराष्ट्रीय सहयोग: वैश्विक मिशन

  • IADC में भागीदारी: अंतर-Agency डेब्रिस कोऑर्डिनेशन कमेटी के साथ सहयोग।
  • मलबा न्यूनीकरण: अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों में योगदान।
  • साझा लक्ष्य: सतत अंतरिक्ष संचालन के लिए वैश्विक प्रयास।

ISRO अंतरराष्ट्रीय सहयोग में सक्रिय रूप से भाग लेता है, विशेष रूप से इंटर-एजेंसी डेब्रिस कोऑर्डिनेशन कमेटी (IADC) के साथ। अंतरिक्ष मलबा न्यूनीकरण दिशानिर्देशों में योगदान देकर, भारत सतत अंतरिक्ष संचालन के लिए वैश्विक प्रयासों में अपनी भूमिका निभा रहा है।


डेब्रिस-मुक्त अंतरिक्ष मिशन: 2030 का लक्ष्य

  • महत्वाकांक्षी योजना: 2030 तक डेब्रिस-मुक्त अंतरिक्ष मिशन।
  • उत्तर-मिशन निपटान: मिशन के बाद उपग्रहों की आयु कम करना।
  • सतत भविष्य: अंतरिक्ष पर्यावरण की सुरक्षा।

2024 में, भारत ने 2030 तक डेब्रिस-मुक्त अंतरिक्ष मिशन की घोषणा की। यह पहल उत्तर-मिशन निपटान दिशानिर्देशों का पालन सुनिश्चित करती है और ऑर्ब

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