भारत अपनी सरकारी योजनाओं को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है, जिसमें यह सुनिश्चित किया गया है कि 31 मार्च, 2026 के बाद कोई भी केंद्रीय प्रायोजित योजना (CSS) या केंद्रीय क्षेत्र योजना (CS) बिना तीसरे पक्ष के मूल्यांकन के जारी नहीं रहेगी। 29 मई, 2025 को कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन की अध्यक्षता में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में, वित्त मंत्रालय ने सभी सचिवों और वित्तीय सलाहकारों को यह स्पष्ट निर्देश दिया। 16वें वित्त आयोग चक्र (2026-2031) के साथ संरेखित यह पहल, जो 2016 के केंद्रीय बजट में शुरू हुई थी, सार्वजनिक व्यय को अनुकूलित करने और परिवर्तनकारी परिणाम देने का लक्ष्य रखती है।
- अनिवार्य मूल्यांकन: 31 मार्च, 2026 के बाद कोई भी योजना बिना तीसरे पक्ष के मूल्यांकन के जारी नहीं रहेगी, जैसा कि वित्त मंत्रालय ने आदेश दिया है।
- परिणाम-केंद्रित दृष्टिकोण: योजनाएं मापने योग्य परिणाम देती हैं, जिससे सतत विकास सुनिश्चित होता है।
- वैश्विक मापदंड: भारत को सार्वजनिक व्यय प्रबंधन में अग्रणी बनाता है।
CSS बनाम CS: भारत की प्रगति की नींव
- CSS का अवलोकन: 54 योजनाएं जो केंद्र और राज्यों द्वारा सह-वित्तपोषित हैं, ग्रामीण विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य को बढ़ावा देती हैं।
- CS का सार: 260 पूरी तरह से केंद्र-वित्तपोषित योजनाएं जो बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण को गति देती हैं।
- मूल्यांकन अनिवार्यता: तीसरे पक्ष के मूल्यांकन और वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर योजनाओं का भविष्य तय होगा।
भारत के विकास का आधार 54 केंद्रीय प्रायोजित योजनाएं (CSS) और 260 केंद्रीय क्षेत्र योजनाएं (CS) हैं। CSS, केंद्र और राज्यों के सहयोग से, ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य कार्यक्रमों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को समर्थन देती हैं। दूसरी ओर, CS, जो पूरी तरह से केंद्र द्वारा वित्तपोषित हैं, बुनियादी ढांचा उन्नयन जैसे राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को गति देती हैं। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि केवल वे योजनाएं जो तीसरे पक्ष के मूल्यांकन में उत्तीर्ण होंगी और 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के साथ संरेखित होंगी, मार्च 2026 के बाद फंडिंग प्राप्त करेंगी।
11.21 लाख करोड़ रुपये: भारत के भविष्य को शक्ति देना
- विशाल बजट: वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 11.21 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय।
- सख्त समयसीमा: जुलाई 2025 तक मूल्यांकन पूरा करना होगा ताकि व्यय वित्त समिति (EFC) की मंजूरी मिल सके।
- रणनीतिक खर्च: बुनियादी ढांचे और सामाजिक सेवाओं के लिए धन प्राथमिकता।
11.21 लाख करोड़ रुपये के विशाल पूंजीगत व्यय के साथ, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत बुनियादी ढांचा निवेश और सामाजिक कल्याण पर बड़ा दांव लगा रहा है। व्याय विभाग ने एक स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की है: मंत्रालयों को जुलाई 2025 तक तीसरे पक्ष के मूल्यांकन पूरे करने होंगे ताकि EFC की मंजूरी मिल सके। यह सुनिश्चित करता है कि धन उन योजनाओं में जाए जो वास्तविक परिणाम देती हैं, जैसे आधुनिक राजमार्ग और मजबूत स्वास्थ्य प्रणालियां।
नीति नवाचार: स्मार्ट, तेज, और निष्पक्ष
- चैलेंज मोड फाइनेंसिंग: राज्यों और मंत्रालयों के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता है।
- आधार-सक्षम DBT: लाभार्थियों तक सीधे लाभ पहुंचाने की गारंटी देता है, बिना रिसाव के।
- योजना समन्वय: दोहराव को समाप्त कर प्रभाव को बढ़ाता है।
भारत केवल मूल्यांकन नहीं कर रहा, बल्कि नवाचार कर रहा है। चैलेंज मोड फाइनेंसिंग मॉडल उच्च प्रदर्शन वाली योजनाओं को पुरस्कृत करके जवाबदेही बढ़ाता है। आधार-आधारित प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) यह सुनिश्चित करता है कि लाभ सही लोगों तक बिना देरी या रिसाव के पहुंचे। दोहराव वाली योजनाओं को मिलाकर, सरकार अपव्यय को कम कर रही है और पारदर्शी शासन और समावेशी विकास की दिशा में बढ़ रही है।
जस्ट-इन-टाइम फंडिंग: हर रुपये का अधिकतम उपयोग
- कोई फंड पार्किंग नहीं: जरूरत के समय ही धन जारी किया जाता है।
- वास्तविक समय बचत: पूर्ण योजनाओं से बचत को नए प्रोजेक्ट्स में लगाया जाता है।
- दक्षता में वृद्धि: सार्वजनिक व्यय का प्रभाव अधिकतम होता है।
जस्ट-इन-टाइम फंडिंग मॉडल एक गेम-चेंजर है। जरूरत पड़ने पर ही धन जारी करके, सरकार फंड पार्किंग को रोकती है, जिससे कोई पैसा बेकार नहीं रहता। पूर्ण योजनाओं से बचत को तुरंत नए या चल रहे प्रोजेक्ट्स में पुनः आवंटित किया जाता है, जिससे सार्वजनिक व्यय दक्षता को बढ़ावा मिलता है। यह एक व्यावहारिक दृष्टिकोण है जो भारत के विकास को गति देता है।
परिवर्तन का नेतृत्व कौन कर रहा है?
- DMEO की भूमिका: नीति आयोग का DMEO CSS मूल्यांकन का नेतृत्व कर रहा है, शीघ्र ही मंत्रालयों के साथ ड्राफ्ट रिपोर्ट साझा करेगा।
- तीसरे पक्ष की विशेषज्ञता: CS के लिए स्वतंत्र एजेंसियां निष्पक्ष मूल्यांकन करती हैं।
- सहयोगी प्रयास: मंत्रालय और नीति आयोग डेटा-आधारित निर्णय सुनिश्चित करते हैं।
नीति आयोग के अंतर्गत विकास निगरानी और मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) CSS मूल्यांकन का नेतृत्व कर रहा है, और जल्द ही मंत्रालयों के साथ ड्राफ्ट रिपोर्ट साझा करेगा। CS के लिए, मंत्रालय तीसरे पक्ष की एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहे हैं ताकि निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित हो। 29 मई की बैठक में वित्त मंत्रालय के निर्देशों से मजबूत यह दोहरी प्रणाली यह गारंटी देती है कि केवल सबसे प्रभावी योजनाएं भारत के भविष्य को आकार देंगी।
2031 की राह: एक स्मार्ट और मजबूत भारत
- जवाबदेह शासन: तीसरे पक्ष के मूल्यांकन पारदर्शी खर्च सुनिश्चित करते हैं।
- सतत विकास: 11.21 लाख करोड़ रुपये बुनियादी ढांचे और कल्याण को शक्ति देते हैं।
- वैश्विक नेतृत्व: भारत सार्वजनिक वित्त नवाचार का नया मानक स्थापित करता है।
16वें वित्त आयोग चक्र की तैयारी के साथ, यह मूल्यांकन एक महत्वपूर्ण मोड़ है। आधार-सक्षम DBT, जस्ट-इन-टाइम फंडिंग, और अनिवार्य तीसरे पक्ष के मूल्यांकन के साथ, भारत एक ऐसा भविष्य बना रहा है जहां हर योजना परिणाम देती है और हर नागरिक समृद्ध होता है। वित्त मंत्रालय और नीति आयोग इस परिवर्तन को जुलाई 2025 तक मूल्यांकन पूरा करने के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। स्मार्ट शासन और सतत विकास को प्राथमिकता देकर, भारत न केवल बेहतर खर्च कर रहा है—यह नीति नवाचार के लिए वैश्विक मापदंड स्थापित कर रहा है।






